प्रतीत्यसमुत्पाद (Pratityasamutpada)

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प्रतीत्यसमुत्पाद (Pratityasamutpada)

Summary of the Book

Annotated Matter

The religious philosophy of Mahatama Budh called Pratityasamutpada delves deep into the causes of our worldly pains and sorrows. Budh treated caste, change and possibility as the basis of his philosophy. However, the views of different philosophers differ.

पुस्तक के विषय में

बौद्ध धर्म-दर्शन में द्वितीय आर्यसत्य है, दुःख समुदयः अर्थात् दुःख का कारण है। इसे ही प्रतीत्यसमुत्पाद कहते हैं। यह बुद्ध विचार की उन उपलब्धियों में है जिसके कारण बौद्धमत आधिकारिकरूप से दर्शन कहलाया। तृतीय आर्यसत्य दुःख निरोध है। वस्तुतः द्वितीय और तृतीय आर्यसत्य का विस्तार ही ‘पटिच्चसमुत्पाद’ अथवा कारणों के उत्पाद सिद्धान्त में हुआ है। कारण को इतना अधिक महत्त्वपूर्ण मानना ‘बुद्ध’ की मौलिक उपलब्धि है। भारतीय चिन्तन के इतिहास में यह श्रेय बुद्ध को ही जाता है कि जाति, परिवर्तन और सम्भवन को उन्होंने अपने दर्शन की आधारशिला बनाया। प्रतीत्यसमुत्पाद की व्याख्या को लेकर सदैव विद्वानों में मतवैभिन्य रहा है जो बार-बार अनेकों झकझोरने वाले प्रश्न और व्याख्याएँ उत्पन्न करते हैं। इन्हीं के समाधान हेतु संगोष्ठी का आयोजन किया गया। व्याख्याओं के नवीन आयाम प्रस्तुत पुस्तक में सहेजने का प्रयास है। निश्चित ही यह पुस्तक बौद्ध-दर्शन के अध्येताओं, जिज्ञासुओं और विद्यार्थियों को प्रतीत्यसमुत्पाद जैसे दुरूह विषय को समझने में सहायक होगी।

Book Content

विषय-सूची


प्राक्कथन

1. प्रतीत्यसमुत्पाद का स्वरूप एवं महत्त्व - नागार्जुन के माध्यमिक दर्शन के संदर्भ में - प्रो. एच.एन. मिश्र
2. प्रारम्भिक बौद्धदर्षन में प्रतीत्समुत्पाद की अवधारणाः एक दार्शनिक समीक्षा - डाॅ. हरि शंकर प्रसाद
3. प्रतीत्यसमुत्पाद और आचारशास्त्राीय अवधारणा - प्रो. एस.आर. व्यास
4. आधारशून्यता, संदेहवाद, प्रतीत्यसमुत्पाद - एक तुलनात्मक चर्चा - डाॅ. राकेश चन्द्रा
5. द्वादश - निदान एवं विश्व-शान्ति - डाॅ. भरत कुमार तिवारी
6. प्रतीत्यसमुत्पाद का शाब्दिक निर्वचन एवं उसका वैशिष्ट्य - डाॅ. डी.एन. शुक्ल
7 महात्मा बुद्ध एवं बौद्ध दर्शन में प्रतीत्यसमुत्पाद - डाॅ. भगवन्त सिंह
8. प्रतीत्यसमुत्पाद एवं विश्व शांति - सुश्री दीपा पाण्डे
9. प्रतीत्यसमुत्पाद सम्बन्धी महात्मा बुद्ध की अवधारणा एवं मन्तव्य - डाॅ. सन्ध्या मोघे
10. प्रतीत्यसमुत्पाद और सृजन-प्रक्रिया - डाॅ. एस. राकेश
11. प्रतीत्यसमुत्पाद: एक दृष्टि - डाॅ. नरेन्द्र कुमार बौद्ध
12. प्रतीत्यसमुत्पाद और निमित्तोपादानवाद - कु. अल्पना जैन
13. प्रतीत्यसमुत्पादः बुद्ध का एक व्यावहारिक दर्शन - डाॅ. ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव
14. च्तंजजलंेंउनजचंकं . च्तवण् िैण्च्ण् क्नइमल
15. ज्ीम ब्वदबमचज व ित्मसंजपअपजल पद डंकीलंउपां ठनककीपेउ ंदक डवकमतद च्ीलेपबेरू । ब्वउचंतपेवद . क्तण् ।सवा ज्ंदकवद


अनुक्रमणी

 
                                                                                                                                 

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