भारत में राजनीतिक चिंतन की परम्परा (Bharat me Rajnitika Chintan ki Parampara)

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Authored By : Singh Vikram

Publisher: Northern Book Centre

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भारत में राजनीतिक चिंतन की परम्परा (Bharat me Rajnitika Chintan ki Parampara)

Summary of the Book

Annotated Matter

Even before greece there was democracy, republicism, monarchy, local Self government etc, in India. The Indian Political thought was contained in Rig Veda, Mahabharat, Kautaliya Arthshastar, Kamandkiya nistar, Shukaraniti, etc. 

पुस्तक के विषय में

प्राचीन भारत में यूनान से भी पहले विकसित गणतंत्रात्मक प्रजातंत्र, स्थानीय स्वशासन, मर्यादित राजतंत्र, राज्याभिषेक एवं पदच्युति में जनमत की गरिमामय भूमिका, राजपद हेतु निर्धारित आचार संहिता, सम्यक् दण्ड विधान, उन्नत कर प्रणाली, उत्कृष्ट विदेश नीति, युद्ध एवं शान्ति के सर्वमान्य नियम एवं राजधर्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चिन्तन की परम्परा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है।

चिन्तन के क्षेत्र में प्राचीन भारत की गरिमामय उपलब्धियों का लेखा-जोखा संस्कृत काव्यों से एकत्र कर विश्लेषणात्मक ढंग से एक ही स्थान पर प्रस्तुत होने से प्राचीन भारत के गौरव को समझना आसान हो गया है।

ग्वेद, महाभारत, कौटिलीय अर्थशास्त्रम्, कामन्दकीयनीतिसारः, शुक्रनीतिः जैसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ, जो मात्र धार्मिक ग्रन्थ के रूप में जाने जाते हैं, में छिपे उत्कृष्ट राजदर्शन को प्रस्तुत कर राजनीतिक चिन्तन के क्षेत्र में भारत की अग्रणीय भूमिका का दिग्दर्शन हुआ है।

पुस्तक की विषय वस्तु दार्शनिकों, राजनीतिक विचारकों, शिक्षाविदों, भारतीय संस्कृतिकारों, इतिहासकारों, योजनाकारों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियांे को राजनीतिक संस्थाओं एवं अवधारणाओं के विकास में भारत की प्रचीनतम गरिमामय भूमिका के अध्ययन हेतु संग्रहणीय दस्तावेज है।

डाॅ. विक्रम सिंह (1960) मैनपुरी, उ.प्र., वर्ष 1996 एवं 2003 के लिए उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा क्रमशः ‘विजयदेव नारायण साही पुरस्कार’ एवं ‘अज्ञेय पुरस्कार’ से पुरस्कृत 1985 बैच के उ.प्र. प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं, उन्हें वर्ष 1997 के ‘मुलादेवी काव्य पुरस्कार’ के अतिरिक्त ‘हिन्दी भूषण’ आदि से विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

विदेश मंत्रालय में अवैतनिक हिन्दी सलाहकार रह चुके डाॅ. सिंह की कविताओं एवं रेडियो नाटकों का प्रसारण आकाशवाणी केन्द्रों, बीबीसी लन्दन एवं दूरदर्शन द्वारा होता रहता है। उनकी साहित्यिक यात्राएं - अमेरिका, ट्रिनीडाड एवं टोबैगो, सूरीनाम, इंग्लैण्ड, फ्रान्स, बेल्जिमय, हालैण्ड, डेनमार्क एवं नार्वे में हुई हंै। पिं्रटिंग मिस्टेक, लकड़बग्घे: शहर में (कविता संग्रह), तदर्थ (रेडियो नाटक), सरहद, मम्मी: फाॅदर माने क्या? (पटकथा), ताजमहल से टाॅवरब्रिज, सूरज: चाँदनी रात में (यात्रा वृतान्त), यथार्थ के समानान्तर (निबन्ध संग्रह), पानी के निशान (कहानी संग्रह) उनकी अन्य कृतियां हैं। सम्प्रति वह सचिव, संभागीय परिवहन प्राधिकरण अलीगढ़ के पद पर कार्यरत हैं।

Book Content

विषय सूची

पुरोवाक्
शुभाशंषा
प्राक्कथन
शब्द-संक्षेप


तालिका सूची

1. प्रस्तावना


2. राजधर्म
3. राज्य का स्वरूप
4. प्रशासन-तंत्र
5. राजस्व एवं कर व्यवस्था
6. न्याय-व्यवस्था
7. विदेश नीति एवं राजनय
8. सैन्य-संगठन एवं सुरक्षा-व्यवस्था

9. उपसंहार


ग्रन्थ सूची
आलोच्य ग्रन्थ
प्राचीन संस्कृत ग्रन्थ
अन्य ग्रन्थ
विशेष ग्रन्थ एवं शोध प्रबन्ध
अनुक्रमणिका
 

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