न्यायमूर्ति सैय्यद मुर्तजा फज़ल अली और हिन्दू विधि (Nayayamurti Sayyad Murtaja Fazal Ali aur Hindu Vidhi)

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Authored By : Nagpal R.C.

Publisher: Northern Book Centre

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न्यायमूर्ति सैय्यद मुर्तजा फज़ल अली और हिन्दू विधि (Nayayamurti Sayyad Murtaja Fazal Ali aur Hindu Vidhi)

Summary of the Book

Annotated Matter

Justice Syed Murtaza Fazil Ali (1920-1985) has analysed and made important contribution in the development of Hindu law. He has delivered some important judgements not only for improvement but also revolutionary judgements.

पुस्तक के विषय में

न्यायमूर्ति सैय्यद मुर्तज़ा फ़ज़ल अली (1920-85) ने अपने निर्णयों में हिन्दू विधि के विश्लेषण एवं विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान किया है। उनके कुछ निर्णय न केवल सुधारात्मक बल्कि क्रान्तिकारी भी कहे जा सकते हैं।

उदाहरणतः यदि कोई हिन्दू धर्मान्तरण करके दूसरे धर्म को अंगीकार कर लेता है तो वह अपनी जाति को खोता नहीं, उसकी जाति केवल ग्रहण-ग्रस्त हो जाती है, यदि वह या उसका कोई वंशज पुनः हिन्दू धर्म में प्रवेश कर लेता है तो उसे अपनी जाति स्वतः प्राप्त हो जाती है, पण्डितों या बिरादरी की सहमति की आवश्यकता नहीं। हिन्दू स्त्री को विवाह के समय प्राप्त स्त्रीधन उसके पति या श्वसुर और सम्बंधियों के कब्जे में न्यास के रूप में रहता है। यदि मांग करने पर वे उसका स्त्रीधन उसे नहीं देते तो वे भारतीय दण्ड संहिता की धारा 405/406 के अधीन न्यास भंग के लिए कारावास और जुर्माने से दण्डित किये जा सकते है। हिन्दू स्त्री दूसरा विवाह कर लेने पर भी पूर्व पति से उत्त्पन्न अपने पुत्र के दिवंगत होने पर उससे उत्तराधिकार रखती है।

यह बहुत सुखद आश्चर्य है कि हिन्दू समाज में इन निर्णयों के विरुद्ध कोई रोष या विरोध नहीं हुआ। क्या ही अच्छा होता कि यदि भारत का मुस्लिम समुदाय भी मुस्लिम विधि पर सुधारात्मक निर्णयों के प्रति इतनी प्रौढ़ता और प्रबुद्धता दर्शाता।

न्यायमूर्तियों को विधि में अपना योगदान करने का अवसर किसी विवाद में निर्णय देते समय ही प्राप्त होता है। विवादों में विषयान्तर एवं समयान्तर होता है। यदि उन निर्णयों को संकलित करके उनकी समीक्षा न की जाए तो कालान्तर में यह विस्मरण हो जाता है कि किसी न्यायमूर्ति का विधि विशेष्ष के क्षेत्र में समग्र कार्य कितना है। अतः उच्चतम न्यायलय के प्रत्येक न्यायाधीश के योगदान को रिकार्ड करने के लिये उसके निर्णयों का संकलन करके उनका अध्ययन अवश्य किया जाना चाहिये।

प्रस्तुत अध्ययन का यही उद्देश्य है कि न्यायमूर्ति सैय्यद मुर्तज़ा फ़ज़ल अली का हिन्दू विधि को योगदान एक स्थान पर उपलब्ध हो जाए तथा विस्मरण की छाया से सुरक्षित हो जाए।


 


 

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